जब स्वास्थ्य प्रणाली विफल रही - दूसरों ने मोर्चा संभाला
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जब स्वास्थ्य प्रणाली विफल रही - दूसरों ने मोर्चा संभाला
When Health Care System Failed – others Thrived. का हिन्दी रूपांतर एवं सम्पादन
~ सोनू बिष्ट
हमारी दुनिया को चलाने वाली सभी प्रणालियाँ कोविड-19 से प्रभावित हैं। जैसे कि, हम भविष्य के संकट के लिए तैयारी कर रहे हैं तो, यह जानना आवश्यक है कि, कौन सी प्रणालियाँ इस महामारी के दबाव को सहने करने या इसे विफल करने में सक्षम रही हैं।
इस लेख में, हम विभिन्न प्रणालियों की समीक्षा कर रहे हैं जो, कोविड से पहले दुनिया का संचालन कर रही थी और इस महामारी के दौरान भी कर रही हैं।
तो आखिर, वे कौन सी प्रणालियाँ हैं, जो इस तरह काम करती हैं जैसे कि, उन पर महामारी का कभी कोई प्रभाव ही नहीं पड़ा, और कौन सी वह है जो, उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं?
"दुनिया" कई प्रणालियों और उप-प्रणालियों का समाकलन है जो, निर्विघ्न रूप से परस्पर क्रिया करती हैं। यदि कोई बड़ी प्रणाली विफल हो जाती है या बाधित हो जाती है तो, दूसरे भी उससे प्रभावित होते हैं।
प्रभाव का पैमाना तीव्रता और व्यवधान के प्रसार पर निर्भर करता है।
जैसा कि, 2008 के वित्तीय संकट में हुआ था, वैश्विक वित्तीय प्रणाली बाधित हो गई थी। परिणामस्वरूप, बैंकिंग और आर्थिक प्रणाली जैसी परस्पर जुड़ी प्रणालियाँ मुश्किल में आ गईं।
इसे विश्व युद्धों के बाद से कभी नहीं देखी गयी एक विशाल संकट- स्थिति माना जाता था।
इसी तरह, यह हमारे चारों ओर की व्यवस्थाओं का आत्मनिरीक्षण और मूल्यांकन करने का समय है।
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बिना किसी प्रशिक्षण के एक साथ बड़ी संख्या में लोगों ने नई आई.टी (IT) कलाकृतियों को अपनाया
क्या विश्व का समर्थन करने वाली प्रणालियाँ विश्वसनीय हैं? वित्तीय व्यवस्था, शिक्षा व्यवस्था, चिकित्सा व्यवस्था, परिवहन व्यवस्था, सूचना व्यवस्था, कृषि व्यवस्था, लोक प्रशासन, उपयोगिता और अंत में मानव व्यवस्था, क्या ये उम्मीद पर खरे उतर रहे हैं?
कोविड-19 के मामले में, इनमें से कई प्रणालियाँ प्रभावित हुई हैं। संकट के समय में कुछ महत्वपूर्ण प्रणालियों के नामों में अर्थशास्त्र, वित्तीय, बैंकिंग, आवास, निर्माण, शिक्षा, यात्रा, कृषिभूमि और कृषि, खुदरा और संभार तंत्र (Logistics), मनोरंजन, चिकित्सा और स्वास्थ्य देखभाल शामिल हैं।
यहां तक कि, हमारी पारिस्थितिक प्रणाली भी प्रभावित हुई है, हालांकि सकारात्मक रूप में।
संकट के इस समय के दौरान, यह समीक्षा करना महत्वपूर्ण है कि, कौन सी प्रणाली समय की पुकार के साथ खड़ी रही और भविष्य की तैयारियों के लिए क्या सबक सीखे जा सकते हैं।
जैसे ही कोविड-19 संकट चीन से यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों में बढ़ा, प्रणालियों ने या तो खुद को रूपांतरित कर लिया या समय की असामान्य मांगों को पूरा करने के लिए खुद को उन्नत (अपग्रेड) कर लिया।
परिभाषित करने के लिए, वर्तमान स्थिति को वैश्विक स्वास्थ्य संकट के रूप में वर्गीकृत करना कोई समझदारी का काम नहीं है। इसने अन्य सभी प्रणालियों में भी संकट का अनुवाद किया है।
संकट की संवेदनशील जगहों (हॉट स्पॉट्स) को अलग करना या स्वस्थ को सुरक्षित करना पहला कदम था।
यह सभी द्वारा अपनाई गई रणनीति रही है। सभी प्रणालियों को पहले बंद करने के निर्देश दिए गए और फिर सबसे पहले चुनिंदा,आवश्यक प्रणालियों को सबसे पहले दोबारा से शुरू किया गया।
कुछ मामलों में, उद्देश्यों को फिर से परिभाषित किया गया और कार्यान्वयन के तरीकों को बदल दिया गया। रोजगार और ऑनलाइन संचार की प्रणाली के रूप में 'घर से काम करना' ( Work from home) नया मानदंड बन गया है।
उदाहरण के लिए, अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय और शहर की सीमाओं पर यात्रा करने वाले यात्री कोविड-19 प्रतिबंधों के पहले शिकार बने। लोगों की आवाजाही पर निर्भर परिवहन का एक बड़ा हिस्सा कुछ ही दिनों में ठप हो गया।
लोगों के आने-जाने की व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। यात्री उड़ानें रद्द कर दी गईं।
कुछ का उपयोग उन नागरिकों को स्वदेश वापस लाने के लिए किया गया जो अन्य लॉकडाउन वाले देशों में फंसे हुए थे। निजी वाहन सड़क से नदारद हो गए साथ ही, आवाजाही के अन्य साधन जैसे हवाई और नौपरिवहन भी।
निजी और सार्वजनिक यात्रा यूरोप में अपनी सामान्य क्षमता के लगभग 25% पर आ गई। लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित होने से उनकी अंतर्निहित आर्थिक व्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ा।
प्रणाली महत्वहीन आर्थिक गतिविधि की ओर बढ़ रही थी।
हालांकि, परिवहन के तकनीकी घटक ज्यों के त्यों और पूरी तरह क्रियाशील बने रहे। अतः, परिवहन प्रणाली ने माल और आवश्यक यात्रियों को स्थानांतरित करना जारी रखा।
शिक्षा प्रणाली को व्यवधान का सामना करना पड़ा किंतु, जल्द ही नए तरीकों से इसे पुनः समायोजित किया गया। इसने अपने परिणामों को अधिकतम करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग किया। ऑनलाइन कक्षाएं शुरू हुईं और अब यह शिक्षा प्रदान करने के 21 वीं सदी के प्रतिरूप (मॉडल) के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती हैं।
सूचना प्रौद्योगिकी भी इस अवसर पर ऊपर उठी। इसने सभी को प्रभावी वीडियो और ऑडियो संचार प्रदान किया। जिस दक्षता से इसने अपेक्षाओं पर खरा उतरना शुरू किया, उससे सामाजिक व्यवस्था में परिवर्तन आया है।
आई.टी (IT) प्रणालियों के उपयोग के संदर्भ में सामाजिक व्यवहार में परिवर्तन उल्लेखनीय रहा है। बिना किसी प्रशिक्षण के एक साथ बड़ी संख्या में लोगों ने नई आई.टी (IT) कलाकृतियों को अपनाया। सारा श्रेय आईटी प्रणाली डिज़ाइनर के उपयोगकर्ता-केंद्रित उद्देश्य को जाता है।
आधारभूत अर्थशास्त्र और वित्तीय प्रणाली ने पहले ही खुद का ध्यान रखा हुआ था। इसने * 'जस्ट-इन-टाइम' (JIT) प्रबंधन प्रणाली के सभी विकल्पों को खोल दिया।
स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को भी सबसे अच्छा प्रदर्शन करना चाहिए था। अन्य सभी प्रणालियाँ को उसकी उप-प्रणालियाँ होनी चाहिए थीं।
इसके बजाय, स्वास्थ्य देखभाल सेवाएँ एक निराशाजनक स्तर तक फिसल गई। यह दुनिया को 'चिकित्सा आपात स्थिति' (Health Emergency ) में बदल रहा था। यहां तक कि, अधिकांश विकसित अर्थव्यवस्थाओं की स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियाँ भी विफल रही।
ऐसा क्यों हुआ?
अपनी आबादी की भलाई के लिए स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को सरकार की कार्यसूची (एजेंडे) में सबसे ऊपर माना जाता था। इसके बजाय, यह वित्तीय प्रणाली के लिए एक उप-प्रणाली बन गया है। मुनाफे ने इसके मूल कार्य को संभाल लिया था।
अतीत में लोगों और सरकारों को इस बात का एहसास नहीं था कि, दुनिया को चलाने के लिए स्वास्थ्य एक आवश्यक शर्त है। कोई अन्य प्रणाली इतनी महत्वपूर्ण नहीं है। यदि देश की जनसंख्या जीवित और स्वस्थ है तो, देश सही से चलेगा और विश्व भी कार्यशील बनेगा।
किसी आबादी की जेब में कम पैसा होते हुए भी, वे जीवित रह सके ऐसा हो सकता है, किंतु, वहीं दूसरी ओर, जीवन द्विआधारी (Binary) है।
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कैंसर, रक्तचाप, मधुमेह, गठिया और अन्य बीमारियों का कोई इलाज नहीं है
यह बहुत बड़ा तथ्य है कि, जब इस तरह का संकट आया तो, स्वास्थ्य देखभाल सेवाएँ, प्रणालियों के पदानुक्रम में सबसे नीचे पहुँच गई थी। पूरी दुनिया को लॉकडाउन और प्रतिबंधों के पीछे संघर्ष करते देखा गया था।
यहां तक कि, सबसे कुशल वित्तीय प्रणालियों वाली समृद्ध अर्थव्यवस्थाएं भी अपने पतन के कगार पर आ गई थीं।
क्या हम यह नहीं कह सकते कि, दुनिया ने खुद को गलत दिशा में डाल दिया था? दुनिया बच जाएगी, किन्तु, फिर से हजारों कीमती जिंदगियां गवांने की अत्यधिक उच्च कीमत पर।
विकासशील देशों की तुलना में समृद्ध अर्थव्यवस्थाएं अधिक अपनी आबादी को गवां रही हैं। यही विडंबना 'जी 7' (G7) के साथ है। इसने ही अधिकतम मार सही और फिर भी सबसे अधिक यही तैयार नही दिख रहा है।
पश्चिम का स्वास्थ्य मॉडल अब जांच के दायरे में है। इसे बुजुर्गों और बीमारों की देखभाल के लिए डिजाइन किया गया था। आज, वे ही हैं जो, सबसे अधिक असुरक्षित हैं और अपनी जान गंवा रहे हैं।
अपने पूरे कामकाजी जीवन के दौरान, ये बुजुर्ग ही थे जिन्होंने, वृद्धावस्था में अपनी भलाई सुनिश्चित करने के लिए आर्थिक और भावनात्मक रूप से योगदान दिया था। किन्तु, जब संकट का समय आया तो, समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं की यही स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली उन्हें धोखा दे गई।
इस संकट में, विनिर्माण और परिवहन प्रणाली की तरह, कई प्रणालियों ने समय की मांग के अनुसार पुनः खुद की सरंचना और आकार को बदला ।
ऑटोमोबाइल कंपनियों को वेंटिलेटर (ventilators) का निर्माण शुरू करने में महज कुछ हफ्ते लगे। अन्य क्षेत्र 'प्रक्षालक' (सैनिटाइज़र) और 'पीपीई' (PPE) का निर्माण करने में सक्षम थे, भले ही, उनकी उत्पादों की श्रृंखला अलग थी।
विज्ञान के रूप में आधारभूत इंजीनियरिंग ने कुशल अनुकूलन में मदद की। दुनिया भर में, हम यह देखना जारी रखे हुए हैं कि, कैसे विभिन्न क्षेत्रों ने इस संकट में सबसे अधिक आवश्यक वस्तुओं के निर्माण के लिए नवाचार और इंजीनियरिंग का उपयोग किया है।
संकट के इस समय में, अन्य प्रणालियों ने भी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की मदद के लिए खुद को बदला है।
यह इंगित करना काफी कटु होगा कि, स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली वह है जिसने सभी को विफल कर दिया है। उन्हें केवल पेशेवरों के लिए चिकित्सा विज्ञान की रक्षा करने के अपने दृष्टिकोण में सबसे परिष्कृत माना गया है।
वैज्ञानिक अनुसंधान आधुनिक चिकित्सा प्रणाली का आधार था। महामारी के चरम के दौरान, जब चिकित्सा पद्धति बचाव के लिए आगे आई, तो यह एक 'जड़ी - बूटी' थी जो, 1799 में ब्रिटिश सेना में प्रारम्भिक डॉक्टरों द्वारा खोजी गई थी। विषाणु- विरोधी (Anti-viral) दवाओं के साथ-साथ क्लोरोक्वीन (chloroquine) रक्षक थी।
तो आख़िर, 21 वीं सदी का वह चिकित्सा अनुसंधान कहां है जिसमें, लाखों घंटे अनुसंधानों और शोध पत्रों को प्रकाशित करने में लगाए गए हैं?
जिस समय निर्माण प्रणालियाँ कुछ ही हफ्तों में परिणाम देने में सक्षम है, उसी वक़्त चिकित्सा प्रणाली के पास अब तक उपचार के बारे में कोई जानकारी नहीं है और अब यह बहुत अधिक 'टिके' पर निर्भर हो रही है। यह तब है जब दुनिया भर में लोग प्रति घंटे 280 की दर से मर रहे हैं।
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विषाणु- विरोधी (Anti-viral) दवाओं के साथ-साथ क्लोरोक्वीन (chloroquine) रक्षक थी
आज की चिकित्सा पद्धति में कुछ तो ऐसा है जो ठीक नहीं है।
स्वास्थ्य प्रणाली का इस तरह अलग होने का एक कारण दुनिया की श्रेणी व्यवस्था में उसकी स्थिति है। यह शीर्ष पर तो नहीं है किंतु, वित्तीय प्रणाली के नीचे जरूर खिसक गयी है। यह जीवन को संरक्षित करने की प्राथमिकता से नहीं बल्कि, आधारभूत वित्तीय प्रणाली द्वारा चलाई जाता है जो, आपूर्तिकर्ता या बीमा कंपनियों के लिए लाभ प्रदान करेगी।
सांख्यिकीय रूप से, स्कूलों की तुलना में अधिक भीड़ वाले अस्पतालों की संख्या अधिक है। बीमारियाँ अधिक पेचीदा होती जा रही हैं, और उनका उपचार भी समान रूप से उतना ही जटिल होता जा रहा है।
सामान्य बीमारियों जिनका इलाज़ प्राप्त हो जाता है उनके ठीक होने की दर कम है। इसकी तुलना में, कैंसर, रक्तचाप, मधुमेह, गठिया और अन्य बीमारियों का कोई इलाज नहीं है।
वास्तव में, आजीवन औषधि-सेवन ही इसका उत्तर है, जिसे निश्चित रूप से इलाज के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता ।
इसलिए, इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि, स्वास्थ्य प्रणाली 21 वीं सदी की अपनी शुरुआती चुनौती में पूरी तरह से विफल हो गई है ।
*जस्ट-इन-टाइम (JIT) इन्वेंट्री सिस्टम एक प्रबंधन रणनीति है जो, आपूर्तिकर्ताओं से सीधे उत्पादन कार्यक्रम के साथ कच्चे माल के ऑर्डर को संरेखित करती है।
कंपनियां इस इन्वेंट्री रणनीति को दक्षता बढ़ाने और माल प्राप्त करके कचरे को कम करने के लिए नियोजित करती हैं क्योंकि, उन्हें उत्पादन प्रक्रिया के लिए उनकी आवश्यकता होती है, जिससे इन्वेंट्री लागत कम हो जाती है।
इस पद्धति के लिए उत्पादकों को मांग का सटीक पूर्वानुमान लगाने की आवश्यकता होती है।
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