क्या यूक्रेन युद्ध जल्द ही समाप्त हो रहा है?
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क्या यूक्रेन युद्ध जल्द ही समाप्त हो रहा है?
Is Ukraine War Ending Soon? का हिन्दी रूपांतर एवं सम्पादन
~ सोनू बिष्ट
कोई भी शांति बहाल करने की बात नहीं कर रहा है. अतः इसका कोई अंत नज़र नहीं आ रहा है। इसके विपरीत, पश्चिम, युद्ध के लिए अधिक समर्थन के साथ कमर कस रहा है।
जर्मनी अब यूक्रेन को (Leopard-2) युद्धक टैंक भेज रहा है। हालांकि इसकी संख्या छोटी है, सिर्फ 14, प्रतीकात्मक रूप से, पर यह एक परिणामी कदम है।
यह (Leopard-2) टैंक को पुनर्निर्यात* (re-exporting) करने के लिए लाइसेंस समझौते को कमज़ोर करने पर भी सहमत हो गया है। लिहाजा, पोलैंड, फिनलैंड और पुर्तगाल जैसे देश यूक्रेन को अधिक युद्धक टैंक भेजने में सक्षम होंगे।
हथियारों की वृद्धि के लिए वसंत ऋतु पूर्वानुमानित समयरेखा है।
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जर्मनी अब यूक्रेन को (Leopard-2) युद्धक टैंक भेज रहा है
समर्थन और एकता के एक संकेत के रूप में, अमेरिका अपना मुख्य युद्धक टैंक, 'अब्राम्स' (ABRAMS), यूक्रेन भेजता है। ये युद्ध में खींची गई नई सीमा रेखाएं हैं।
यूक्रेन अधिकाधिक युद्धक टैंकों की उम्मीद कर रहा है। वह 300 टैंकों की मांग कर रहा है। पश्चिमी रणनीतिकारों का मानना है कि, यह वह संख्या है जो, रूस पर युद्ध के रुख को बदल देगी।
किंतु, अगर यूक्रेन को सफलता मिलती है तो, क्या वह सिर्फ अपनी रक्षा करेगा या अपने खोए हुए डोनबास प्रदेश के भूभाग को पुनः प्राप्त करेगा?
ये टैंक 3 - 4 महीने में पहुँचा दिए जाएंगे। इसका मतलब यह है कि, पश्चिमी योजनाकारों और युद्ध रणनीतिकारों को काफी समय तक के लिए युद्ध का अंत नहीं दिख रहा है।
इसके अलावा, यह मामलों को और अधिक उलझा देगा क्योंकि, रूस को युद्ध को आगे बढ़ाने के लिए कुछ महीनों का समय और मिल जाएगा।
युद्धक टैंक चाबियों वाली कारों की तरह नहीं हैं, जो जाने के लिए तैयार हैं। उन्हें सैन्य तंत्र और प्रशिक्षण सहायता की आवश्यकता होगी, जो कि, जल्दी से स्थापित करना चुनौतीपूर्ण है।
इसके अलावा, ये सुविधाएं यूक्रेनी क्षेत्र में नहीं हो सकती हैं। उन्हें पोलैंड या कहीं दूसरी जगह होना चाहिए और जिसके लिए उन देशों को युद्ध में घसीटना होगा।
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यूक्रेन अधिकाधिक युद्धक टैंकों की उम्मीद कर रहा है। वह 300 टैंकों की मांग कर रहा है
इस बीच, राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की, यूरोप के दौरे पर हैं और वह ब्रिटिश प्रधान मंत्री, फ्रांसीसी राष्ट्रपति और जर्मन चांसलर से मुलाक़ात कर रहे हैं। ज़ेलेंस्की लड़ाकू विमानों (fighter jets) की मांग कर रहे है और उन्हें "स्वतंत्रता के लिए पंख" (wings for freedom) कह रहे है।
यह नाटो (NATO) के साथ पहले से ही एक छाया युद्ध है, और ये कदम यूक्रेन और समर्थक देशों के खिलाफ रूसी जवाबी कार्रवाई को और वैधता प्रदान करेंगे। इसके अलावा, यह यूरोप में युद्ध का विस्तार कर सकता है।
वहीं दूसरी तरफ रूस के बारे में भी कहा जा रहा है कि, वह बड़ी ताकत जुटा रहा है। वे वसंत आक्रमण के लिए कमर कस रहे और पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दे रहे हैं।
पिछला साल नुकसान और सामरिक वापसी के साथ उनके लिए खराब रहा है। भीतर से दबाव के साथ, पुतिन के पास अपनी ताकत दिखाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। यह उनके राजनीतिक अस्तित्व के लिए भी महत्वपूर्ण है।
यूक्रेन की हथियारबंदी के पीछे पश्चिम का दृष्टिकोण मानता है कि, युद्ध के मैदान में सफल होना वार्ता की मेज़ पर प्रबल होना होगा। किन्तु, इसका मतलब यह भी है कि, रूस भी अपनी युद्ध रणनीति में नयापन लाएगा।
जैसा कि, उन्होंने लुहांस्क और डोनबास क्षेत्रों में विनाशकारी टैंकों के नेतृत्व वाले आक्रमण के बाद किया था।
बदली हुई रणनीति के साथ, वे अब यूक्रेन भर में मिसाइलों का उपयोग नाज़ुक बुनियादी ढांचों पर हमला करने और उन्हें तितर-बितर करने के लिए कर रहे हैं। अब कोई पारंपरिक मोर्चे नहीं हैं।
युद्ध की इस गंभीरता के साथ, कोई भी ज़ेलेंस्की और पुतिन को शांति के बारे में वार्तालाप के लिए बैठक करने की कल्पना नहीं कर सकता।
लिहाजा दोनों में से किसी एक को झुकना होगा और समझौते के लिए रास्ता निकालना होगा, जो कि कमज़ोर है। अतः, यह युद्ध दोनों में से कमज़ोर को खोजेगा - पश्चिम समर्थित यूक्रेन या रूस।
दुर्भाग्य से, अभी के लिए, इनमें से कोई भी कमज़ोर नहीं है।
पश्चिम और यूक्रेन के भीतर, दोनों की तरफ से कई भय व्याप्त है जैसे कि, यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति करने से रूस द्वारा परमाणु हमला किया जा सकता है। यह युद्ध के मैदान में हथियारों की होड़ को भी बढ़ावा देगा।
यूक्रेन और रूस विश्व स्तर पर सर्वश्रेष्ठ हथियार प्राप्त करने के लिए संवेदनशील स्थान (हॉट स्पॉट) होंगे।
यूरोप और दुनिया भर में ऊर्जा बाजार के स्थिर होने के साथ, ईंधन मुद्रास्फीति के लिए कोई सार्वजनिक आक्रोश नहीं है। इसके बजाय, ऊर्जा कंपनियों के लिए उपयुक्त उपलब्धता और लाभ को संतुलित करने के लिए आपूर्ति और कीमतों में हेरफेर किया गया है।
रूसी तेल पर 60 डॉलर की स्वीकृत मूल्य सीमा सभी पक्षों को सक्रिय और संतुष्ट रख रही है।
पश्चिम द्वारा भोजन की कमी को अच्छी तरह से प्रबंधित किया गया है। या तो आपूर्ति श्रृंखला बहाल हो गई है या जनता ने नई असामान्य स्थिति के साथ जीना सीख लिया है।
पहले के संघर्षों में, हमने देखा है कि, युद्धरत पक्ष आतंकवाद, जासूसी, रासायनिक हथियारों के उपयोग और परमाणु युद्ध के खतरे में लिप्त रहे हैं।
युद्ध शुरू हुए लगभग एक साल हो गया है, और फिर भी कोई सुलह वार्ता के बारे में बात नहीं कर रहा है। "शांति" यह शब्द अभी भी अनसुना है।
ये सभी बातें संकेत हैं कि, युद्ध जल्द खत्म नहीं हो रहा है।
*पुनर्निर्यात का अर्थ है - विदेशी वस्तुओं का निर्यात जो पहले से ही किसी विदेशी देश से देश में आयात किया जा चुका है।
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