भारतीय पुलिस व्यवस्था आज स्वीडन (जहाँ मानवाधिकारों और कानून का बहुत सम्मान होता है) और एक 'बनाना रिपब्लिक' (कमज़ोर, अराजक और भ्रष्ट देश) के बीच में खड़ी है। भारतीय पुलिस को खुद अपने भीतर बहुत कुछ सुधारने की ज़रूरत है।

मुख्य बातें. 

1. पुलिस हिरासत में मौतें (Custodial Deaths) कोई इक्का-दुक्का घटनाएँ नहीं हैं:

लेख के अनुसार, पुलिस या न्यायिक हिरासत (जेल) में कैदियों की मौत होना अब एक सामान्य बात बन चुकी है। लगातार सामने आने वाले बड़े मामले और हर साल होने वाली मौतों के बड़े आँकड़े यह दिखाते हैं कि यह किसी एक पुलिसवाले की गलती नहीं है, बल्कि पूरी व्यवस्था (System) में एक गहरी बीमारी है।

2. समस्या की जड़ें अंग्रेजों के ज़माने के कानून में हैं:

भारत की पुलिस व्यवस्था का बुनियादी ढांचा अंग्रेजों के समय के '1861 के पुलिस एक्ट' के तहत बना था। उस ज़माने में पुलिस का काम जनता की सेवा करना नहीं, बल्कि जनता को डराना और उन पर काबू पाना था। 

आजादी के इतने सालों बाद भी पुलिस का वह डराने-धमकाने और ज़बरदस्ती करने वाला तौर-तरीका आज भी काफी हद तक वैसा ही बना हुआ है।

3. संविधान में अधिकार तो हैं, लेकिन जवाबदेही कमज़ोर है:

यूं तो हमारे संविधान का आर्टिकल 21 (जीवन का अधिकार), अदालतों के कई बड़े फैसले, थानों में सीसीटीवी (CCTV) लगाने के आदेश और पुलिस के खिलाफ शिकायत सुनने वाली अथॉरिटीज मौजूद हैं। लेकिन ज़मीनी हकीकत में इन नियमों का पालन ठीक से नहीं होता। 

इसके अलावा, भारत में पुलिसिया प्रताड़ना (Torture) के खिलाफ अलग से कोई सख्त कानून नहीं है, जिसके कारण दोषी पुलिसवालों को सजा मिलना बहुत दुर्लभ होता है।

4. हिंसक तौर-तरीकों को बढ़ावा क्यों मिलता है?

पुलिस हिरासत में हिंसा इसलिए बची हुई है क्योंकि हमारी व्यवस्था और समाज खुद इसे बढ़ावा देते हैं। 

केस को जल्दी सुलझाने का भारी दबाव, जाँच के कमज़ोर तरीके, अदालतों की सुस्त रफ्तार और आम जनता में 'तुरंत न्याय' या 'मुठभेड़' (Encounter) को सही मानने की सोच के कारण पुलिस को लगता है कि मारपीट और ज़बरदस्ती करना ही सबसे आसान शॉर्टकट है।

5. समाधान: कानून और सोच दोनों में बदलाव ज़रूरी है:

लेख में कहा गया है कि इस स्थिति को सुधारने के लिए पुलिस पर नजर रखने वाली आज़ाद संस्थाओं को मजबूत करना होगा, संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रताड़ना विरोधी नियमों को मानना होगा और मानवाधिकारों का सम्मान करने वाली पुलिसिंग को बढ़ावा देना होगा। 

हमें पुलिसवालों को बल प्रयोग या ताकत दिखाने के लिए इनाम देने के बजाय, कानून के दायरे में रहकर ईमानदारी से काम करने के लिए प्रेरित करना होगा।


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